अन्य जानकारी - माँ कात्यायनी मंदिर, खगड़िया

ऐतिहासिक मान्यताएं -

माँ कात्यायनी शक्तिपीठ ५२ शक्तिपीठों में से एक है | इस शक्तिपीठ में माँ का दाहिना हाथ गिरा था | माँ कात्यायनी के लोक गीत (अहरण)में विददमान सत्य उल्ल्लेखित है चौथम राज के राजा मंगल सिंह और श्रीपंथ महाराज दोनों मित्र थे और माता कात्यायनी नें इन्ही दो व्यक्तियों को स्वपन में दर्शन देकर अपने अस्तित्व का ज्ञान दिया था | कहा जाता है की माँ , कात्यायान ऋषि के पुत्री के रूप जन्म लेकर कात्यायनी कहलाई देवी पुराण में दुर्गा के जिन नौ रूपो का वर्णन किया गया है उसमे दुर्गा का छठा रूप माँ कात्यायनी का है |

धार्मिक मान्यताएं -

माँ कात्यायनी शक्तिपीठ में जितने भी भक्त जन अपनी मनोकामनाए लेकर आते है उनकी मनोकामनाए पूर्ण होती है | माँ कात्यायनी शक्तिपीठ में अन्य शक्तिपीठो के पूजन परम्पराओ से अलग पान पूजा की परम्परा है जो अन्य शक्तिपीठो में देखने को नहीं मिलती है | माँ कात्यायनी शक्तिपीठ पशु पालक भक्त जनों के लिए भारत का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल है यहाँ दुधारू पशु के नए बच्चो को जन्म देने के उपरांत सर्व प्रथम माँ के चरणों में चढ़ाया जाता है किसी भी दुधारू पशु के बीमार परने पर के दरबार में पूजन के पश्चात उस बीमार दुधारू पशु की बीमारी ठीक हो जाती है | इस मनोकामना के उपरान्त अन्य मन्नतों के पान पूजन होने पर श्रद्धालु के द्वारा वही पूजा एवं खीर का भोजन कराया जाता है | सोमवार एवं शुक्रवार को माँ की विशेष पूजन का महत्त्व है |


पर्व त्यौहार -

  • वासंतीय/चैत्र नवरात्र
  • शारदीय/अश्विन नवरात्र
  • आषाढ़ गुप्त नवरात्र
  • माघ गुप्त नवरात्र
  • महा शिवरात्रि

समय सारणी -

  • मंदिर खुलने का समय : प्रातः - 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक
  • दोपहर - 2:30 से संध्या 5 बजे तक
  • आरती - प्रातः 6 बजे एवं संध्या 5 बजे